Dr. Rashmi Singh : एडीएचडी (ADHD) शिशु के लिए समस्या भी है और वरदान भी
मगर, सही मार्गदर्शन में एडीएचडी (ADHD) से पीड़ित बच्चा अपने जीवन में बहुत अधिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं।आप को ताजुब होगा यह जान कर के की बहुत से ख्याति प्राप्त और अत्याधिक सफल उधमी कभी बचपन में एडीएचडी (ADHD) से पीड़ित थे।
Attention deficit hyperactivity disorder (ADHD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है. इस विकार में व्यक्ति के लिए ध्यान देने और अपने आवेगी व्यवहार/impulsive behaviors को नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस होती है। वह या तो बेचैन/ restless हो जाता है या लगभग लगातार सक्रिय/ active हो सकता है.
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के लक्षण-
आसानी से विचलित हो जाना , चीजें भूल जाना , और अक्सर एक काम को पूरा किया बिना ही दूसरे में लग जाना
एक काम पर फोकस बनाए रखने में कठिनाई होना
किसी कार्य को व्यवस्थित करने, पूरा करने या कुछ नया सीखने में कठिनाई होना
एक जगह पर टिककर ना बैठना
जरूरत से ज्यादा बोलना या बिना सोचे समझे कुछ भी करना या बोलना
मना करने पर भी गलत काम करते रहना
सवाल पूरा होने से पहले जवाब देना या लगातार दखल देना
आसानी से भ्रमित हो जाना
ये लक्षण आमतोर पर बच्चो में 3 से 4 साल की उम्र के आसपास देखे जाते है. साथ ही यह लक्षण बच्चे के जीवन जैसे घर और स्कूल में नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं. रिसर्च के अनुसार, भारत में लगभग 1 से 12 प्रतिशत तक बच्चों में यह समस्या पाई जाती है.
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के कारण
एडीएचडी के सही कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन मनोविज्ञानिको के अनुसार एडीएचडी के विकास में कई कारक शामिल हैं जैसे:
Environment – पर्यावरण,जीवनशैली,बिहैवियर आदि.
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का इलाज- एडीएचडी के प्रबंधन के लिए कई प्रकार की पद्धतियों का सहारा लिया जाता है जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, पारस्परिक मनोचिकित्सा, फैमिली थेरेपी, कौशल प्रशिक्षण आदि. साथ ही impulsivity को कम करने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए कई प्रकार की दवाओ का इस्तेमाल भी बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है.



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